Tuesday, October 10, 2006

मस्ती का आलम ,,,,सूफ़ी संगीत

कैलाश खेर ,
एक अजीब सी मस्त आवाज़ ,,जैसे दुनिया की सारी फ़क्कड़ई उन्ही में समाइ हो। कैलाश को सुनना एक नयी दुनिया में प्रवेश करने जैसा है.. उनके एलबम "कैलासा" के एक गाने का लिन्क दे रहा हूँ। सुनिये और बताइये आपने क्या मह्सूस किया।

कैलाश खेर - नैहरवा


4 comments:

Dr Prabhat Tandon said...

सुन कर मजा आ गया, लेकिन मुझे लग रहा है कि शायद यह किसी और ने गाया है, नाम धयान नही आ रहा , लेकिन इसका कैसेट मेरे पास है।

Dr Prabhat Tandon said...

हां, यह कुमार गन्धर्व जी की आवाज है.

Abhishek Sinha said...

प्रभात जी ,,हो सकता है कि यह गाना पन्डित जी ने भी गाया हो ,, पर जिसका लिन्क मैंने अपने पोस्ट में दिया है.. वह कैलाश खेर ने ही गाया है... मैने उनके इस अलबम का म्यूज़िक इन्डिया ऑनलाइन पर लिन्क भी दिया है.. इसमें आप कैलाश के अन्य गाने भी सुन सकते हैं।

Abhishek Sinha said...

प्रियान्कर जी ,
इतनी सुन्दर उक्ति के लिये धन्यवाद।